Sunday, 13 July 2014

किसी शायरने मौत को क्या खुब कहा है;
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जिंदगी मे २ मिनट कोई मेरे पास ना बैठा.. ,

आज सब मेरे पास बैठे जा रहे थे.. .
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कोई तौफा ना मिला आज तक.. ,

और आज फुल-हि-फुल दिये जा रहे थे.. .
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तरस गये थे हम किसी एक हाथ के लिये.. ,

और आज कंधे पे कंधे दिये जा रहे थे.. .
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दो कदम साथ चलने को तैयार न था कोई.. ,

और आज काफिला बन साथ चले जा रहे थे.. .
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आज पता चला मुझे कि "मौत" कितनी हसिन होती है.. .

कम्बख्त. . . हम तो युहि 'जिंदगी' जिये जा रहे थे.. . ..

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