SANKLAN
DINESH GOGARI'S BLOG
Saturday, 16 August 2014
रिश्वतनामा
साहिब रिश्वत लीजिए,
रिश्वत बिन सब सून।
बिन रिश्वत जीवन गया,
मिले ना आटा नून।।
रिश्वत ऐसी चीज है,
जो ना खाए पछताए।
औरन को छलनी करे,
खुद साबुत बच जाय।।
कोर्ट कचहरी नगर निगम,
या फिर हो थाना।
आरटीओ से बचा ना कोई,
देना पड़ता दाना।।
यह तन सुख की बेलरी,
घूस अमृत की खान।
घूस लिए, पर जेल मिले,
तो भी सस्ती जान।।
रिश्वत मेरे यार की,
जित देखूं तित माल।
रिश्वत खाकर मैं चला,
बीवी मालामाल।।
__._,_.___
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