SANKLAN
DINESH GOGARI'S BLOG
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Monday, 28 July 2014
तुम्हारे और मेरे बीच अगर कुछ होगा तो वो सिर्फ प्रेम होगा
हमारी हथेलियों पर हर पल अंकुरित होता प्रेम
स्पर्श की ऊष्मा से...
और हमारे इर्द गिर्द फ़ैली होंगी बेचैनियाँ,
हमें एक दूसरे की ओर धकेलती हुई!
किसी और को करीब आने की नहीं होगी इजाज़त
बस एक दो जुगनू और कुछ तितलियाँ
सच मानो बड़ी ज़िद्द की है उन्होंने...
हाँ! एक महीन अदृश्य पर्दा होगा
तुम्हारे और मेरे बीच, कि छिपे रहें मेरे गम
कि तुम्हारी खुशियों को नज़र न लगे उनकी|
तो फिर ये तय हुआ कि हमारे बीच अगर कुछ होगा तो वो सिर्फ प्रेम होगा
या होगा एक पागलपन या फिर दर्द प्रेम के न होने का!
(तुमने क्या तय किया कहो न??)
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