मैंने कर दिया है अपना सर्वस्व तुम्हें अर्पण
मेरे पास अब न रूप है, न मन
कोरे पन्ने सा हो गया मेरा श्वेत रंग
मेरे पास अब न रूप है, न मन
कोरे पन्ने सा हो गया मेरा श्वेत रंग
अब न बिम्ब है, न प्रतिबिम्ब शेष है सर्वत्र
प्रेममय भावो के निर्मल कांच से निर्मित बस एक दर्पण
करते-करते तुम्हारा पूजन मुझे गाने लगे हैं भजन
मुझे भाने लगे हैं तुम्हारे स्मरनो के पवित्र चरण
प्रेममय भावो के निर्मल कांच से निर्मित बस एक दर्पण
करते-करते तुम्हारा पूजन मुझे गाने लगे हैं भजन
मुझे भाने लगे हैं तुम्हारे स्मरनो के पवित्र चरण
पड़ा रहता हूँ वहीं पर होऊं जैसे -
ढेरों अर्पित सुगन्धित शुष्क सुमन
न जड़ हूँ न चेतन शेष हैं सर्वत्र
तुम्हारी यादों की महक से - भरा बस एक उपवन
ढेरों अर्पित सुगन्धित शुष्क सुमन
न जड़ हूँ न चेतन शेष हैं सर्वत्र
तुम्हारी यादों की महक से - भरा बस एक उपवन
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