SANKLAN
DINESH GOGARI'S BLOG
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Wednesday, 13 August 2014
जिसके मात्र स्मरण से ही , हर संताप बिसर जाता है
वह तो केवल एक कृष्ण हैं !
जिसकी स्वप्न झलक पाते ही हर आकर्षण बिखर जाता है
जो सबके दुःख का साथी है सबका पालक, जनक, संहर्ता
वह तो केवल एक कृष्ण हैं !
साक्षी सबके पाप पुण्य का, न्यायमूर्ति सृष्टि का भरता,
वह अवतार प्रेम का मधु का, अनघ, शोक मोह का हरता
वह तो केवल एक कृष्ण हैं !
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